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परिवार का पहला इंजिनियर

परिवार का पहला इंजिनियर होना पहली बार मे इतना सुखद लगता है की जैसे राहुल गाँधी को अमित शाह ने अगला प्रधान मंत्री कॅंडिडेट घोषित कर दिया हो. ये उस दौर की बात है जब भारत के भविष्य रण बांकुरे चंद्रकान्ता और अलिफ लैला देख के खुद को तुर्रम ख़ान समझा करते थे , खेल कोई सा भी दे दो - लगानी सबको बौंड्री ही थी .बस ऐसी हाइ पिच एनर्जी युवा दौर मे 10वी निकलते ही जिंदगी का सबसे बड़ा सवाल सामने था - "बेटा Maths या Bio" .इतने प्‍यार से कभी मेरी मार्क शीट ना देखने वाले बापू ने मुझे अचानक अहसास दिलाया की मेरे "लंबे वाले " लगने का वक़्त आ गया है . हेड टेल करके डिसाइड किया की Maths ही ले लेते , वैसे भी "BIO तो वो लेते है जिनकी आर्ट्स अच्छी होती है " . आज मुड़ कर देखता हूँ तो लगता है , इतनी भी आर्ट्स नही चाहिए थी ,शायद मैं ओवर एस्टिमेट कर गया था बिल्कुल वैसे ही जैसे अमेरिका पाकिस्तान को , चाइना North Korea और कॉंग्रेस को अब तक पप्पू को . खैर उन दिनो का दौर ही ऐसा था की आपका बच्चा अगर IIT की coaching ना करे तो मतलब आप ने उसे गोद लिया है . घर पर इतनी इज़्ज़त तो थी अपनी कि ...